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40 साल से जिस माफिया अतीक का आतंक था आज वह हमेशा के लिए खत्म हो गया है। प्रयागराज की कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है। अतीक और उसके भाई की शनिवार की देर शाम को रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल लाते समय तीन हमलावरों ने पुलिस कस्टडी में गोली मारकर हत्या कर दी थी।

दो दिन पहले अतीक का बेटा असद भी एनकाउंटर में मारा गया था। असद को भी इसी कब्रिस्तान में दफन किया गया है। उसी के बगल में अतीक और अशरफ की कब्र खोदी गई थीं। यहीं पर अतीक के पिता और माता की भी कब्र हैं। पिता अतीक और चाचा अशरफ के जनाजे में शामिल होने के लिए बाल गृह सुधार में बंद अतीक के नाबालिग बेटे पहुंचे थे। इसके अलावा अशरफ की नाबालिग बेटियां और नाते-रिश्तेदार भी कब्रिस्तान पर पहुंचे थे। हालांकि शाइस्ता परवीन के पहुंचने की चर्चा थी लेकिन वह न तो बेटे असद की मौत पर पहुंची और न ही पति के इंतकाल पर नजर आईं।

अतीक और अशरफ के शवों को दफनाने के बाद सभी नाते-रिश्तेदार अब वापस अपने-अपने घरों को निकल गए हैं। पुलिस फोर्स भी मौके से लौटने लगी है। बतादें कि पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद अतीक और अशरफ के शवों को शव वाहन से कसारी-मसारी कब्रिस्तान लेकर पहुंच गए थे। वहीं पिता और चाचा की आखिरी बार सूरत देखने के लिए उनके नाबालिग बेटों को भी एंबुलेंस में बिठाकर कब्रिस्तान लाया गया है। दोनों नाबालिग बेटे पिता और चाचा के जनाजे में शामिल हुए हैं। हालांकि भाई असद के जनाजे में ये दोनों शामिल नहीं हो सके थे। अतीक और अशरफ का शव भी बेटे असद के बगल में दफनाया जाएगा। इसके अलावा अतीक के कई रिश्तेदार भी कब्रिस्तान पहुंचे थे।

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