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12 जून को पटना में भाजपा विरोधी दलों की विपक्षी एकता मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आएंगे या राहुल गांधी या फिर कोई तीसरा नेता, ये देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने अभी तय नहीं किया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि कांग्रेस पार्टी 12 जून की पटना मीटिंग में जरूर हिस्सा लेगी लेकिन पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि उसका प्रतिनिधित्व वहां कौन करेगा। बिहार के सीएम और जेडीयू नेता नीतीश कुमार की मेजबानी में विपक्षी दलों की इस पहली औपचारिक मीटिंग पर सबकी निगाह टिकी है।

जयराम रमेश ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस निश्चित रूप से पटना में विपक्षी नेताओं की मीटिंग में हिस्सा लेगी लेकिन कांग्रेस से कौन भाग लेगा, यह तय नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जल्द ही तय करेगी कि 12 जून को पटना की मीटिंग में कौन शामिल होगा। जेडीयू नेताओं ने दावा किया है और कई नेताओं ने पुष्टि भी की है कि पटना की मीटिंग में पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना के एक धड़े के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे समेत 18 विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे।

विपक्षी एकता की पहल भले नीतीश ने की हो लेकिन इसका सारा दारोमदार कांग्रेस पर है क्योंकि उसे ही इसके लिए कई राज्यों में वहां की मजबूत पार्टियों के लिए सीटों की कुर्बानी देनी होगी। जेडीयू के नेता कह रहे हैं कि पहल कामयाब रही तो देश की कम से कम 450 से 475 लोकसभा सीटों पर 2024 में विपक्षी दलों का एक साझा कैंडिडेट होगा। ममता बनर्जी ने तो खोलकर कहा है कि कांग्रेस 200 से 250 सीट लड़े और बाकी सीटों पर दूसरे विपक्षी दलों को समर्थन करे।

नीतीश की पहल पर पटना आ रही पार्टियों के नेताओं में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव उन नेताओं में हैं जो गैर भाजपा के साथ-साथ गैर कांग्रेस विकल्प की बात करते रहे हैं। इन नेताओं का कांग्रेस से बातचीत के लिए तैयार होना नीतीश की एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

वैसे नीतीश कुमार को विपक्षी एकता की कोशिश में बीजेडी अध्यक्ष और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, तेलंगाना के सीएम और बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव से निराशा हाथ लगी है। यूपी में एक राजनीतिक ताकत बसपा भी है जिसकी अध्यक्ष मायावती इस पहल के दायरे में भी नहीं रखी गईं।

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